Gujarat Model: Road Se Real Estate Aur Tax Ka Loop
* गुजरात डेवलपमेंट के एक ऐसे यूनिक और कभी न खत्म होने वाले चक्कर में फंस चुका है, जहाँ से बाहर निकलना अब नामुमकिन है!
* लोगों को रोजगार और कनेक्टिविटी मिले, इसलिए सरकार एक नई रोड बनवा देती है।
* रोड बनते ही आसपास के खेतों के दाम आसमान छूने लगते हैं, तो किसान जमीन बेचता है और सरकार को भारी कैपिटल गेन टैक्स मिलता है।
* जो बिल्डर वो ज़मीन खरीदता है, वो उसे NA (Non-Agricultural) करवाकर रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रोजेक्ट पास करवाता है—सरकार को फिर से टैक्स मिलता है!
* लोगों को लगता है कि आगे चलकर भाव और बढ़ेंगे, तो प्रोजेक्ट पास होते ही धड़ाधड़ दुकानें बुक हो जाती हैं—सरकार को स्टैम्प ड्यूटी का टैक्स फिर मिलता है!
* प्रोजेक्ट तैयार होते ही दुकानें री-सेल में बिकती हैं—सरकार को फिर टैक्स!
* फिर कोई बिजनेसमैन सोचता है कि यहाँ धंधा अच्छा चलेगा, तो वो दुकान किराए पर ले लेता है—रेंट एग्रीमेंट पर सरकार को फिर टैक्स!
* और उस दुकान में दिन-रात होने वाली हर छोटी-बड़ी खरीद-बिक्री पर सरकार की जेब में GST तो लगातार जाता ही रहता है!
* अब इतनी बार टैक्स मिलने की वजह से सरकार के पास फिर से इतना फंड इकट्ठा हो जाता है कि उसे किसी नए एरिया में नई रोड निकालनी पड़ती है!
* वैसे आपने गुजरात के किस एरिया या शहर में अपनी पहली प्रॉपर्टी इन्वेस्ट की है? कमेंट करके जरूर बताइएगा!
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