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जुलाई 5, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नवोदय और मेरे जीवन से जुड़ी कुछ कविताएं अंग्रेजी में (Hemnandan कि कविताएं भाग 2)

दोस्तो वैसे तो मै ज्यादातर हिन्दी में ही लिखता हूं पर कुछ कविताएं मैने अंग्रेजी में भी लिखी है और ये कविताएं लोगो द्वारा बहुत सराही गई है। आप भी इनका आनंद लीजिए। आशा है आपको भी पसंद आएंगी। पहली कविता है कि मै कुछ कहना चाहता हूं।  I want to  share something I want to  share something, something with you by my art. Because there are many, many memory in my heart. There are many memorable, a memorable moment in my life, but the best one is that I, I way into navodaya after big strife. The first day of navodaya, I start to cry, cry because I don't know anyone, on last day, eyes can't control tears, tears because I know everyone. Life is obstinate and difficult, and favorable circumstances are few, whatever I m and whatever becomes, only and only because of you. यह कविता JANAAB जो कि नवोदयविद्यालय के एलुमनी कि एक संस्था है, ने पसंद किया था और JNV SURAT कि सिल्वर जुबिली पर प्रकाशित अपनी मेगेजीन में सामिल क...

नवोदय कि यादें ताजा करती (Hemnandan कि कविताएं भाग 1)

दोस्तो आइए आज नवोदय कि कुछ यादें ताज़ा करते हैं और अपने बचपन को इन कविताओं के सहारे फिर से जीते है। नवोदय में प्राथना हॉल के पीछे ली गई 2011 की तस्वीर तो दोस्तो नवोदय के दिनों को याद दिलाती हुई मेरी पहली कविता का नाम है मुझे कुछ याद नहीं। मुजे कुछ याद नहीं .. . जब बस से हम क्लस्टर को जाते थे कितने बेसुरे होकर हम गाना गाते थे लड़कियों को दोस्तों की नाम से चीडाते थे आज गर्लफ़्रेंड होकर भी दिल आबाद नहीं भूल गया वो सफ़र.. मुझे  तो कुछ भी याद नहीं ..। टीम के जितने की ख़ुशियाँ सब मानते थे एक दूजे को देख, सब मन ही मन मुस्कुराते थे वापसी में जो अक्सर घूमने जाया करते थे उस दिन के यादों का कोई जवाब नहीं भूल गया वो दिन.. मुझे तो कुछ भी याद नहीं ..। दो दिन के क्लस्टर में तीन लड़कियों पे जान लुटाते थे चोथे दिन हम सबको भूल जाते थे नाम पता पता नहीं, फिर भी भाभी बनाते थे कोन कहता हे हम आज़ाद नहीं भूल गया वो प्यार .. मुझे तो कुछ भी याद नहीं ..। दूसरी नवोदय में पुराने दोस्त जो मिलते थे अचानक नाम अपना स...