नवोदय कि यादें ताजा करती (Hemnandan कि कविताएं भाग 1)

दोस्तो आइए आज नवोदय कि कुछ यादें ताज़ा करते हैं और अपने बचपन को इन कविताओं के सहारे फिर से जीते है।
नवोदय में प्राथना हॉल के पीछे ली गई 2011 की तस्वीर
तो दोस्तो नवोदय के दिनों को याद दिलाती हुई मेरी पहली कविता का नाम है मुझे कुछ याद नहीं।

मुजे कुछ याद नहीं ...
जब बस से हम क्लस्टर को जाते थे
कितने बेसुरे होकर हम गाना गाते थे
लड़कियों को दोस्तों की नाम से चीडाते थे
आज गर्लफ़्रेंड होकर भी दिल आबाद नहीं
भूल गया वो सफ़र..
मुझे तो कुछ भी याद नहीं ..।

टीम के जितने की ख़ुशियाँ सब मानते थे
एक दूजे को देख, सब मन ही मन मुस्कुराते थे
वापसी में जो अक्सर घूमने जाया करते थे
उस दिन के यादों का कोई जवाब नहीं
भूल गया वो दिन..
मुझे तो कुछ भी याद नहीं ..।

दो दिन के क्लस्टर में तीन लड़कियों पे जान लुटाते थे
चोथे दिन हम सबको भूल जाते थे
नाम पता पता नहीं, फिर भी भाभी बनाते थे
कोन कहता हे हम आज़ाद नहीं
भूल गया वो प्यार ..
मुझे तो कुछ भी याद नहीं ..।

दूसरी नवोदय में पुराने दोस्त जो मिलते थे
अचानक नाम अपना सुन, चेहरे जो खिलते थे
अनजान लोगों को मिलाकर एक टीम बनती थी
छोटे बड़े सब बराबर, यहाँ कोई उस्ताद नहीं
भूल गया वो टीम..
मुझे तो कुछ भी याद नहीं ..।

आपको ये कविताएं पढ़ कर केसा लगा, कमेंट में जरूर बताइए।
धन्यवाद!

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