Gujarat Ka 700 Saal Purana Loknatya Bhavai Aur Uske 360 Vesh * गुजरात में लोग भवाई देखने के लिए दूर-दूर से पैदल आते थे, जिसकी शुरुआत आज से 700 साल पहले असाईत ठाकर ने की थी। * भवाई में मुख्य कलाकार को अलग-अलग भेष (वेश) धारण करके लोगों का मनोरंजन करवाना होता है, क्योंकि एक ही भेष को बार-बार देखकर लोग बोर हो जाते। * और इसीलिए असाईत ठाकर ने 50-100 नहीं, बल्कि पूरे 360 अलग-अलग भेषों की रचना की! * जिसमें झंडा झूलण, माडीबा सती, पतई रावल, कान-गोपी, छेल-बटाउ के साथ-साथ मियां-बीवी का भेष तो फेमस है ही। * रामदेव पीर का भेष भवाई में सबसे पुराना माना जाता है, और 'रंगलो-रंगली' वाले हास्य किरदारों की तो बात ही निराली है! * "આ લોણા ભાઈ આ લોણા, કુવા માં નાખ્યા ચણા, ચણા ગયા સડી, અને ભવાઈ જોવા આવો ફરી..." * लेकिन अफ़सोस, डिजिटल दौर में अब भवाई से उतनी कमाई नहीं हो पाती जिससे इन कलाकारों (भवाया) का पेट भर सके, इसलिए नई जनरेशन इसे सीखने से कतरा रही है। * तो आपको भवाई का कौन सा किरदार या भेष सबसे ज्यादा पसंद है? SEO Keywords: #Bhavai #GujaratCulture #Rang...
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