* गुजरात में डांडिया और गरबा के साथ-साथ नाटक का एक प्रकार 'भवाई' (Bhavai) बहुत ही फेमस है। * जिसकी शुरुआत आज से 700 साल पहले असाईत ठाकर (Asait Thakar) ने की थी, और इसके पीछे की कहानी बड़ी ही इमोशनल है। * अलाउद्दीन खिलजी के सैनिकों ने जब पाटन पर आक्रमण किया था, तब पैसे लूटने के साथ-साथ वो बहन-बेटियों को भी नहीं छोड़ते थे। * और कड़वा पाटीदार (Kanbi) समुदाय की एक बेटी 'गंगा' असाईत ठाकर के घर शरण लेने आई हुई थी। * उसी समय कुछ मुस्लिम सैनिक असाईत ठाकर के घर आ धमकते हैं। * क्योंकि असाईत ठाकर को संगीत और अभिनय का अद्भुत ज्ञान था, इसलिए वे अपने संगीत से सैनिकों को खुश कर देते हैं। * तब सैनिक खुश होकर बोलते हैं कि "तुम्हें जो मांगना है मांगो।" * तब ठाकर कहते हैं कि "मुझे कुछ नहीं चाहिए, बस आप लोग इन बहन-बेटियों के साथ खिलवाड़ न करें और इस बेटी को छोड़ दें।" * तभी एक चाड़िया (चुगलखोर) बोलता है कि "असाईत, तेरी तो कोई सगी बेटी है नहीं! यदि यह तेरी सगी बेटी है तो इसके साथ एक ही थाली में खाना खाकर दिखा।" * इसके बाद क्या हुआ था यदि आपको पता ह...
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