Akshaya Patra Foundation Gujarat Mid Day Meal Scheme
* गुजरात के बड़े शहरों के सरकारी स्कूलों में अब अलग से मिड-डे मील (Mid-Day Meal) का खाना पकता ही नहीं है!
* जब मैंने यह बात सुनी तो उत्सुकता में एक स्कूल जाकर पता किया, तो मालूम हुआ कि सरकार मिड-डे मील का पूरा फंड 'अक्षय पात्र' (Akshaya Patra) फाउंडेशन को ट्रांसफर कर देती है।
* साल 2000 में महज 5 स्कूलों के 1500 बच्चों से शुरू हुआ यह फाउंडेशन आज इतने विशाल सेंट्रलाइज्ड किचन्स (Centralized Kitchens) चलाता है, जहाँ एक साथ 50,000 से भी ज्यादा बच्चों का खाना बनता है!
* इनके किचन्स की सबसे खास बात यह है कि पूरा प्रोसेस ऑटोमेटेड है—रोटी बनाने की ऐसी विशाल मशीनें लगी हैं जो सिर्फ 1 घंटे में 50,000 से ज्यादा गरमा-गरम रोटियाँ तैयार कर देती हैं!
* एक ही मेगा-किचन से पूरे शहर के स्कूलों में खाना सप्लाई होने की वजह से न्यूट्रिशन और हाइजीन की क्वालिटी 100% मेंटेन रहती है।
* वैसे सरकार से एक गुजारिश तो बनती है कि यह पौष्टिक खाना प्राइवेट स्कूलों के जरूरतमंद बच्चों को भी मिलना चाहिए, क्योंकि कई बार सरकारी स्कूल दूर होने की वजह से मजबूरी में लोग बच्चों को प्राइवेट में भेजते हैं।
* आपके एरिया या शहर के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के खाने की क्वालिटी कैसी रहती है? कमेंट करके जरूर बताइएगा!
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