Gujarat Me Women Empowerment Aur Rapido Ka Mazedar Kissa
* गुजरात के गाँवों में भी लड़कियों का स्कूटी या बाइक चलाते हुए दिख जाना बिल्कुल आम बात है, और शहरों में तो लड़कियाँ अब ओला, उबर और रैपिडो भी चलाने लगी हैं!
* मुझे एक दिन स्टेशन जाना था तो रैपिडो बुक की, तो एक लड़की बाइक लेकर आ गई।
* आकर बोलती है—"भैया, आपने स्टेशन का रास्ता देखा है?" मैंने कहा—"हाँ, देखा है।" फिर बोली—"आपको बाइक चलाना तो 100% आता होगा?" मैंने कहा—"हाँ, बिल्कुल आता है!"
* तो बड़े प्यार से बोली—"आधे रास्ते तक आप ड्राइव कर लीजिए ना! मुझे एक बहुत ज़रूरी कॉल करना है... वो क्या है ना, ड्राइविंग करते समय फोन पर बात करना मेरे उसूलों के खिलाफ है!"
* मैंने कहा—"अरे बहन! मुझे ड्राइव नहीं करना था इसीलिए तो मैंने रैपिडो बुक किया! बाइक तो मेरे घर पर भी खड़ी है!"
* इस पर वो तुरंत मुस्कुराकर बोली—"भैया! आप लोग ही अगर हमें सपोर्ट नहीं करोगे तो वुमन एम्पावरमेंट (महिला सशक्तिकरण) कैसे होगा?"
* मैंने भी हँसते हुए जवाब दिया—"ठीक है बहन! संडे को मेरी छुट्टी रहती है, अपनी बाइक और मोबाइल मुझे दे देना... पूरे दिन तेरे नाम से रैपिडो मैं चलाऊँगा!"
* गुजरात की बेटियों का यह कॉन्फिडेंस और आत्मनिर्भर बनने का ज़ज्बा सच में काबिल-ए-तारीफ़ है!
* वैसे आपने अपने आस-पास वुमन एम्पावरमेंट को सपोर्ट करने के लिए अब तक क्या-क्या अनोखा किया है? कमेंट करके जरूर बताइएगा!
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