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चार राज्यों का मिलन (कहानी Hemnandan और Asha की)

इस तस्वीर में मेरी पत्नी Asha और मैं Hemnandan है, हमारी शादी के तीन महीने बाद जब हमने एक-दूसरे को जान पहचान लिया तब हमने यह पहली तस्वीर एक साथ ली थी।
हमारी शादी फरवरी 2019 में हुई थी, शादी से पहले हमने एक दूसरे को देखा भी नहीं था। हमने शादी के तीन महीने बाद तक बात नहीं की और मई 2019 में हम फिर से मिले। वह बहुत सुंदर है। मैं बहुत भाग्यशाली महसूस करता हूं कि मैं उससे मिला। 
कहानी को थोड़ा विस्तार से लिखता हूं
चार राज्यों का मिलन
मेरे पिता गुजरात में काम करते हैं इसलिए मैं यहां पला-बढ़ा हूं। 2005 में जब मेरा नवोदय में चयन हुआ तब से लेकर 2012 तक मैंने JNV SURAT में हि पढ़ाई की और Navodaya में ही रहा और अपने जीवसाथी के बारे में नजाने क्या क्या सपने देखे। किसी किसी लड़की के साथ मेरा नाम जोड़ देता था या चिढ़ा देता था तो लगता था जैसे मेरी सादी करवा देने वाला हो। कई लड़कियां पसंद आयी और नाजाने कई बार दिल टूटा। नवोदय और मेरे जीवन से जुड़ी कुछ कविताएं मैने लिखीं। और अब तो मुझे कुछ याद नहीं।
उसके पिता झारखंड में एक कंपनी में काम करते हैं, उसका जन्म भी यहीं हुआ था। वह वहीं पली-बढ़ी है। अपना बचपन जिनके साथ बिताया है उनमें से आज कोई भी उसे नहीं जानता और नाही उसके पास किसी का नंबर है।बस मुझे अपने सखियों के बारे में बताती रहती है।
हम दोनों का मूल राज्य बिहार है। इसलिए, हमारे माता-पिता अपने बच्चों के लिए रिश्ता खोजने बिहार गए। मेरे पिता ने कई लड़कियां देखीं कुछ पसंद आई कुछ नहीं तो कहीं बात नहीं जमी। आखिर में वे एक-दूसरे से मिले, उसके पिता ने मुझे देखा और मेरे पिता ने उसे। उन्होंने शादी तय की और मुझे बताया गया कि लड़की अच्छी है, गोरी है, अच्छा खानदान है तो हमने तेरी सादी तय कर दी है।
उन्होंने हमसे कुछ नहीं पूछा, हमारे यहां आज भी लड़के लड़की से पूछने या कहने कि जरूरत नहीं होती। बच्चे आज्ञाकारी होते है वे कभी अपने मां बाप का विरोध नहीं करते। खास कर पिता का। हममें से कोई भी इस विषय पर अपने माता-पिता के सामने बोलने में सक्षम नहीं था। फरवरी 2019 में हमारी बिहार में शादी हो गई, सादी के दिन मैने उसे एक दो बार तिरछी नज़र से देखा था। जितना भी देखा बहुत खूबसूरत लग रही थी। सादी के दिन भी किसी प्रकार का कोई खास सृंगार नहीं किया था बस कुछ जरूरी गहने पहने थे। बाद में उसने बताया कि eyebrow बनवाया था। 
वह जिस दिन मेरे घर आई उस पूरे दिन खुसी का माहौल था, रस्म और रिवाज पूरे किए जा रहे थे और मै इसी कोशिश में था कि एक बार उसे देख लेता। उसका चेहरा घुंधट से और पूरा शरीर ढेर सारे कपड़ो से ढका हुआ था। शाम को जब मैंने उसे देखा तो देखता रह गया। वह उस सफेद गुलाब जैसी है जिसे हरे पत्तो से घेर लिया गया हो। हमने दो दिन साथ में बिताया पर joint family में रहने की वजह से मै उसे ज्यादा समय नहीं दे पाया। इन दो दिनों में हमने ठीक से बात भी नहीं की।
एक परीक्षा का दूसरा पड़ाव होने के कारण मैंने उसे बिहार छोड़ दिया और सिर्फ 2 दिनों में गुजरात आ गया। मेरा बिलकुल भी मन नहीं था परन्तु जैसे तैसे पहला पड़ाव पास होने के बाद दूसरा पड़ाव नहीं छोड़ सकता था और मैंने ढेर सारी मेहनत के साथ परीक्षा दी।
हर किसी ने इस कदम के लिए मेरी आलोचना की। सबने कहा कि ऐसी कौन सी परीक्षा है कि तू इतनी जल्दी जा रहा है। मैंने वहीं किया जो सही लगा, जो उसके future के लिए सही लगा। मैंने परीक्षा पास की और मेरा चयन  हो गया और फिर तीन महीने बाद मैं उससे मिलने वापस बिहार गया।
अब मैं भारतीय रेलवे में महाराष्ट्र में  काम कर रहा हूं। वर्तमान में हम यहां हैं। और हम बहुत खुश है। अब हर कोई मेरी प्रशंसा करता है।
सादी का मेरा अनुभव बहुत खूबसूरत रहा और मैने ये सीखा की जैसे भगवान हमें मां बाप भाई बहन अपनी मर्जी से देता है और हम किसी से ये फरमाइश नहीं करते कि हमें ऐसा भाई चाहिए वैसी बहन चाहिए वैसी मां चाहिए या ऐसा पिता चाहिए, ठीक वैसे ही हमें ये मान लेना चाहिए कि पत्नी भी भगवन अपनी मर्जी से देता है। मेरा फेसबुक  देख कर आपको पता चल जाएगा। 
जय हिन्द जय नवोदय
आपके विचारो का कमेंट में स्वागत है।


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